Mera Yaar Jogiya

मेरा यार जोगिया वे
मेरा प्यार जोगिया वे
मै जोगन तेरी
तू मेरा जोगिया

maa

bchpan me jin akhon se draya krtii thi..

ajj unhi ankhon se samjhatii haiiii…

kbhiii betii wo b thi kisiki ajj beti ko samjhati hai..

door bhjne se aksar ghbra jatii thiii…

aur judda abbhi na hona chahti haii…

maa ke pairon me jannat dekhne wale b 

wo khuda k bnde hai preet…

nahii…ajj ki duniya me ye rabb ki surat..

enhe bojh nazar ati hai

মন মানেনা

একা একা বসে আছি
ঘরের কোণে,
রচে যাই ছন্দ বাণী
আপন মনে।
চারিদিকে বন্ধ বলে
মেজাজটা নাই,
জানিনা আগামী দিনে তো
কি হবে তাই!
মানুষ তো আর চায় না
সে যে থাকবে ঘরে,
লক ডাউনের বিধি নিষেধ
ভাঙবে সে যে কেমন করে!
ভাবতে থাকে ফন্দি ফিকির
বিধি ভাঙার কারি কুরি,
তাই সে খেলে পুলিশ
সাথে লুকোচুরি।
এই না দেখে পুলিশও
বেশ মার কাটারি,
কেউবা খাবে মৌন হয়ে
লাঠির বারি, আবার
কেউ দেখাবে নিয়ম ভেঙ্গে
জারি জুড়ি।
মাথা মোটা পুলিশ কি আর
সাধে বলে!
আইন ভাঙার সে হেডমাস্টার
পড়লে দলে।
বাগে পেলে মনের সুখে
লাঠির মার,
ভাঙলে ভাঙুক আমজনতার
পাঁজর- হাড়।
সকাল হলেই রোজ বাজারে
লোকের ভিড় উপচে পড়ে,
মনে হয় করোনা বুঝি
উঠবেনা আজ বিছানা ছেড়ে।
না, না, না, না আর একটু
তাই হোক না দেরি,
পুলিশ এলে পালিয়ে
যাবো তাড়াতাড়ি।
করোনা এখন জায়গা পেলো
পেছন দিকে,
আতঙ্ক টা জায়গা নিল
কপাল লিখে।
বলতে পারি পেটের ক্ষুধা
যায়না রোখা,
মধ্যবিত্তের ত্রাণের কথা
যায়না লেখা।
নেতাদের ত্রান নিয়ে সব
মিথ্যে বকা,
এমন শুনে যায়না তো আর
ঘরে থাকা।
ইচ্ছেকরে কলার ধরে
প্রশ্ন করি,
ত্রাণ নিয়ে সব হচ্ছে কেনো
ছলচাতুরি?
কি জানি আজ রাজনীতিটা
কোথায় গেছে!
দেশের মজবুত গণতন্ত্র
বলাই মিছে।
না,না,না,না আম জনতা
চায়না সেটা,
মিথ্যা রাজার মিথ্যা বানীর
মজা লোটা।।

सेतु कविता

हे रे कोरोना कब जाओगे तुम कहो ना
जगत को सारा बंधक बनाके मुश्किल मे है डाला ……
जनम लिया है तूने वुहान शहर मे
वायरस रुप बनाया
पता न लगे के तेरा जनम हुआ है
चीन ने सबसे छिपाया
इसपेन इगलेड अमरीका मे
कितना कहर है ढाया…..
स्टे होम लाकडाउन सोसल डिस्टेन्स का
मंत्र बताया मोदी ने
घर से निकलो किसी से न मिलना
यंत्र बताया मोदी ने
सेनेटाइजर से हाथ है मलना
साबुन से हाथ धोना ……
लाश का अंबार लगता प्रतिदिन
मौत न रोके से रुके
बंद हुए कलकारखाना भी
अर्थव्यवस्था भी टूटे
सबके सहयोग से हारे कोरोना
साथी हाथ बढ़ाना ….
कोरोना कब जाओगे कहो ना

सेतु चौपाई

!! चौपाल !!

लइका सियान जेन मेर सकलाथें
खेती-किसानी के गोठ- गोठियाथें
अउ जानना हे देश-बिदेश के बात
दिल्ली होवय चाहे के भोपाल के
गोठ सुन हमर गांव के चौपाल के. .

नीति धरम के के ताक होथे
ताक अउ हाँसी-मजाक होथे
अउ सियानी के गोठ घलो सुन
माधो, रमेसर अउ गोपाल के
गोठ सुन हमर गांव के चौपाल के. .

बिहनिया नहा-धोके जम्मो ऑथें
रथिया भात खाके इ करा ठुलाथें
अब्बड़ सुहावना लागथे संगवारी
कइसे करव बखान सुघ्घर महौल के
गोठ सुन हमर गांव के चौपाल के. .

गनेश चउथ म लम्बोदर बिराजथन
नवराति म दुर्गा दाई नेवत के लाथन
चँउक ल सजाथन छाँवनी बनाके
फ़बित का कइबे चाँदनी,तिरपाल के
गोठ सुन हमर गांव के चौपाल के. .

 सेतराम साहू "सेतु"

कोई गहरा पुराना दोस्त फिर से मिलेगा क्या !

लॉक डाउन में मेरी बचपन की यादें बिखर सी गई है,
उन्हें फिर से मिलाएगा क्या !
कोई गहरा पुराना दोस्त फिर से मिलेगा क्या !

वो स्कूल केे दिन याद बोहोत आते हैं,
लेकिन हवा केे एक झोकेे केे साथ,
पल भर मे बिखर जाते हैं।
कोई उनसे मिलवाएगा क्या!
कोई गहरा पुराना दोस्त फिर से मिलेगा क्या!

जब आंखे बंद करता हूँ तो ,
वो हॉस्टल के दिन याद आते हैं।
मेरी रूह को बार -बार ,
उसी कमरे में ले जाते हैं।
कोई उन यादों से रूब रू करवायेगा क्या!
कोई गहरा पुराना दोस्त मिल भी पाएगा क्या!

धरती बचाए

सूनी है सड़के हैं सुनसान रहे,
नहीं है कोई भी जो शोर मचाए।
इंसान है जो वो घरो मै चुपा है,
प्राकृतिक दंड अब उनको मिला है।

है पक्षी का जीवन खुशहाल सारा,
शुद्ध हो गया है ये आकाश तुम्हारा ।
पशु भी हुए अब तो खुश इस जीवन से,
नहीं आरहा कोई जंगल का विध्वंश करने।।

हंसता है चंदा और हंसता है मंगल,
जो रचते थे रहने के सपने वहां पर।
वो मुंह को छुपाए अंधेरे में बैठा,
अपने जीवन के वो पुण्य को गिनता।

है बादल भी अब तो खूब बरसता ,
सूरज भी अब खूब है तपता।
सभी चाहते बस इंसान सुधरे,
किसी भी तरह धरती की अहमियत को समझें।

खुद भी रहे और सबको बचाए,
शुद्ध आकाश को ना काला बनाए।
ना जंगल को काटे ना नदियों को कूड़ा बनाए,
खुद भी बचे और धरती बचाए।।

                     @shutosh....