**एक तरफा सफ़र**

डर लगता है दूर ना हो जाए वो मुझसे कहीं,
इसलिए दिल की बात जुबां पर नहीं लाती हूं।

शायद मेरी मोहब्बत उसे कुबूल ना हो कभी,
इसलिए इजहार करने से मैं ज़रा कतराती हूं।

क्या पता उसे मेरी शख्शियत पसंद आई हो,
उसके पलभर दीदार से मैं तो खिल जाती हूं।

कोशिश करती हूं लेकिन बयां नहीं कर पाती,
उसकी ना को सोचकर ही मैं सहम जाती हूं।

वो लाजमी है मुझे दिल की धड़कनों की तरह,
उसके बिना तो मैं जिंदा लाश ही बन जाती हूं।

क्या पता ये एक तरफा सफर कब खत्म होगा,
मैं कल भी उसे चाहती थी आज भी चाहती हूं।