Mother

she was there when no one was
she accepted you with all your flaws

she loves you without any condition
in return she only asks for attention

she won’t eat till she knows you are safe
every moment with you she does embrace

she held you when you were at your lowest
and smiled with joy at your highest

her stories of virtues never ends
good wishes to you she always sends

she is a human like no other
there is a reason why she is called A MOTHER.

Maa..

main firr Apne maa ki Acholo ke saya me sona chahata hu …
apne maa ke pyari pyari hathon se khana khana chahata hu main …
par kya karo majbur hu main..
‌apne maa se kosho durr hu main..

वो मां ही होती है

ममता,करुणा,और दया की जो मूरत कहलाती है वो मां ही होती है….
हमारी हर परेशानी जो हमेशा खुद पर ही ले जाती है वो मां ही होती है….
हमे ज़रा सा डांटने के बाद जो खुद भी रो जाती है वो मां ही होती है….
हमें देखकर जो अपनी थकान तक भूल जाती है वो मां ही होती है….
हमारे दुख को जो बिना बताए भी पहचान जाती है वो मां ही होती है…..
नींद ना आने पर जो खुद जागकर हमे सुलाती है वो मां ही होती है….
हर गलती पर जो दोस्त बनकर भी हमें समझाती है वो मां ही होती है….
हमारी खुशी देख जो अपने गम को भी भूल जाती है वो मां ही होती है….
हमारे हर मर्ज की जो दवा बनकर राहत पहुँचाती है वो मां ही होती है….
जीवन के अंधियारे में जो उजयारी बन साथ निभाती है वो मां ही होती है….
चोट लगने पर जो हमेशा सबसे पहले ही याद आती है वो मां ही होती है….
अपनी ममता के आगे जो भगवान को भी झुका जाती है वो मां ही होती है….

maa

O maa
Subhey tere pairo
Sham tere pairo
Raat tere pairo
Pr kat deni meine
Addat sari buri chod deni mein
Jo jo to booley sub baat teri man lunga mein
Tere pas sub kuch var du mei
tujhey to pta ha maa fr bhi bta du mei
Parsan bhot to hai
Tera laal kha alag tujhse hai ..

happy mother’s day

मां

ज़ख्म कुछ भी हो
वो दवा अपने हाथो में रखती है
खुद कितनी भी तकलीफ में हो
मुस्कान होठों पे रखती है
मेरी जन्नत है वो
मेरी मां मेरे इश्क़ का पहला पन्ना लिखती है

maa

छोटी छोटी चोट को झट से पहचान लेती है
बिना बताए मां सब जान लेती हैं।

प्यार

माँ की डाँट में छुपा हुआ प्यार देखती हूॅं।
चरणों में उसके संसार का सार देखती हूॅं।
कौन कहता है कलियुग में ‘भगवान’ नही मिलते,
मैं तो दर्शन करती हूॅं ‘त्रिदेवों’ का, मुख ‘माँ’ का जितनी बार देखती हूॅं।।

मां

पीसती रही वो खुद को मेरे सपनों के लिये
स्वादिष्ट व्यंजन सा निखरा जीवन ये मेरा