कौन किसका है जहाॅं …

*कौन किसका है जहाॅं में*
हर कोई अकेला है।
सुख दुख के खेल का
अनोखा यह मेला है।

हर किसी का भाग्य प्रभु ने
अलग ज़रूर बनाया है।
क्या कोई ऐसा घर है…
जहाँ सुख दुख न आया है।

रिश्ते कितने गहरे हो
फिर भी बिखर जाते है।
अकेले आए हैं और
हम अकेले चले जाते हैं।

माता पिता भाई बहन
पति पत्नी यह सब रिश्ते।
कितने लोग हैं ऐसे जो
यह रिश्ते कभी न हारे हैं।

जान से प्यारे रिश्ते भी
अक्सर टूट जाते हैं।
बाँह पकड़ चले हो जिनकी
वह भी छूट जाते हैं।

सच्च पे झूठ,प्यार पे नफ़रत
जब भारी पड़ जाते हैं।
ऐसे में रिश्तों के प्यारे बंधन
झट से टूट जाते हैं।

सबको मालूम है एक दिन
सबको यहाँ से जाना है।
फिर भी हर इन्सान यहाँ
बुनता भविष्य का ठिकाना हैं।

खुद के दुख को खुद सहता है
कौन किसी का दुख लेता है।
जान से प्यारा भी कोई होता
अंत समय का संगी न होता।

जीत कहे सब झूठे रिश्ते
सब यहीं रह जाएँगे।
ख़ाली हाथ सब आयें हैं
ख़ाली हाथ ही जाएँगे।

*कौन मिलेगा किस राह में*
*कौन किसका है जहाँ में*

कश्तियां बच जाती हैं…

कश्तियां बच जाती हैं
‌ तूफान में
हस्तियां मिट जाती हैं,
अभिमान में
बाहर रिश्तों का मेला है,
और
अंदर से हरशख्स अकेला है,
यह इंसान का नहीं,
यही वक्त और जिंदगी का
खेला है..!!

जिंदगी में टेंशन ही …

जिंदगी में टेंशन ही टेंशन है फिर भी
इन लबों पर मुस्कान है,

              क्योंकि 

जीना जब हर हाल में है तो मुस्करा कर
जीने में क्या नुकसान है।।