हम उन्हें रुलाते हैं…

हम उन्हें रुलाते हैं, जो
हमारी परवाह करते हैं,
(माता पिता और पत्नी)….

हम उनके लिए रोते हैं, जो
हमारी परवाह। नहीं करते….
( औलाद )

और हम उनकी परवाह
करते हैं, जो हमारे लिए
कभी नहीं रोयेगें…!!
‌‌ ( समाज )