kyu jinda hu mai

kisi ko jarurt nhi meriphir kyu jinda hu mai.kya kasur h mera kyu paresan hu mai .kisi ko apna kah kr dil se na apna pana logo ka dastur h .kisi ko jarurt nhi meri kyu jinda hu mai.

ROYALTY

ROYALTY  is when the man makes a unique status in life.

ROYALTY is not in living Standard
ROYALTY is when we are thinking standard. ROYALTY don’t need a bank balance
ROYALTY needs a bonding of LOVE.

ROYALTY is not seen in the property of man. 

Royalty is seen in the heart

ROYALTY is nothing but ThinKing in positive ATTITUDE. 

To make every movement unforegtable in world is real ROYALTY

 To make place in the heart of people is real ROYALTY

Attitude determines your direction. ??

जिम्मेदारी

दुनिया की सबसे बेहतर दवाई हैं    
                 जिम्मेदारी …
       एक बार पी लीजिए जनाब ,
    जिन्दगी भर थकने ही नहीं देती …

               ?? ??

परिवार

आज की शिक्षा
हुनर तो सिखाती है ।
संस्कार कहाँ दे पाती है।

पिछले वर्ष का है ये किस्सा,
ऐसा ही एक बेटा ,देकर घिस्सा
पुस्तैनी घर बेचकर,
माँ के विश्वास को तोड़ गया ।
उसको यतीमों की तरह,
दिल्ली के एयर पोर्ट पर छोड़ गया।

परिवार

परिवार अब कहाँ, परिवार
तो कब के मर गए।
आज जो है,वह उसका केवल
टुकड़ा भर रह गए ।

पहले होता था दादा का,
बेटों पोतों सहित,भरा पूरा परिवार,
एक ही छत के नीचे ।
एक ही चूल्हे पर,
पलता था उनके मध्य,
अगाध स्नेह और प्यार।

अब तो रिश्तों के आईने,
तड़क कर हो गए हैं कच्चे,
केवल मैं और मेरे बच्चे।
माँ बाप भी नहीं रहे
परिवार का हिस्सा,
तो समझिये खत्म
ही हो गया किस्सा।

होगा भी क्यों नहीं,
माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में,
बेटों को घर से दूर
ठूंस देते हैं किसी होस्टल में,
पढ़ने के बहाने।
वंचित कर देते हैं प्रेम से
जाने अनजाने।

आज की शिक्षा
हुनर तो सिखाती है ।
पर संस्कार कहाँ दे पाती है।

पढ़ लिख कर बेटा डॉलर की
चकाचोंध में,
आस्ट्रेलिया, यूरोप या अमेरिका
बस जाता है।
बाप को कंधा देने भी कहाँ
पहुंच पाता है।

बाकी बस जाते हैं बंगलोर,
हैदराबाद, मुम्बई,
नोएडा या गुड़गांव में।
फिर लौट कर नहीं आते
माँ बाप की छांव में।

पिछले वर्ष का है किस्सा,
ऐसा ही एक बेटा ,देकर घिस्सा
पुस्तैनी घर बेचकर,
माँ के विश्वास को तोड़ गया ।
उसको यतीमों की तरह,
दिल्ली के एयर पोर्ट पर छोड़ गया।

अभी अभी एक नालायक ने
माँ से बात नहीं की, पूरे एक साल।
आया तो देखा माँ का
आठ माह पुराना कंकाल ।
माँ से मिलने का तो केवल
एक बहाना था ।
असली मकसद फ्लैट
बेचकर खाना था।

आपसी प्रेम का खत्म होने को है पेटा ।
लड़ रहे हैं बाप और बेटा ।
करोड़पति सिंघानियां को
लाले पड़ गये हैं खाने के ।
बेटे ने घर से निकाल दिया,
चक्कर काट रहा है
कोर्ट कचहरी थाने के।

परिवार को तोड़ने में अब तो
कानून ने भी बो दिए हैं बीज ।
जायज है लिवइन रिलेशनशिप
और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज ।

ना मुर्गी ना अंडा ना
सास ससुर का फंडा ।
जब पति पत्नी ही नहीं तो
परिवार कहाँ से बसते ।
कॉन्ट्रैक्ट खत्म, चल दिये
अपने अपने रस्ते ।
इस दौरान जो बच्चे हुए,
पलते हैं यतीमों की तरह ।
पीते हैं तिरस्कार का जहर ।

अर्थ की भागम भाग में
मीलों पीछे छूट गए हैं,
रिश्ते नातेदार ।
टूट रहे हैं घर परिवार ।
सूख रहा है प्रेम और प्यार ।
परिवारों का इस पीढ़ी ने
ऐसा सत्यानाश किया कि,
आने वाली पीढ़ियां सिर्फ
किताबों में पढ़ेंगी —-
“वन्स अपॉन अ टाइम,
देयर वाज लिवींग
जोइंट फैमिली इन इंडिया
दैट इज कॉल्ड परिवार”

परिवार

आज की शिक्षा
हुनर तो सिखाती है ।
पर संस्कार कहाँ दे पाती है।
पढ़ लिख कर बेटा डॉलर की
चकाचोंध में,
आस्ट्रेलिया, यूरोप या अमेरिका
बस जाता है।
बाप को कंधा देने भी कहाँ
पहुंच पाता है।
बाकी बस जाते हैं बंगलोर,
हैदराबाद, मुम्बई,
नोएडा या गुड़गांव में।
फिर लौट कर नहीं आते
माँ बाप की छांव में।

परिवार

अब परिवार कहाँ!

पहले होता था दादा का,
बेटों पोतों सहित,भरा पूरा परिवार,
एक ही छत के नीचे ।
एक ही चूल्हे पर,
पलता था उनके मध्य,
अगाध स्नेह और प्यार।

परिवार

अर्थ की भागम भाग में
मीलों पीछे छूट गए हैं,
रिश्ते नातेदार ।
टूट रहे हैं घर परिवार ।
सूख रहा है प्रेम और प्यार ।
परिवारों का इस पीढ़ी ने
ऐसा सत्यानाश किया कि,
आने वाली पीढ़ियां सिर्फ
किताबों में पढ़ेंगी —-
“वन्स अपॉन अ टाइम,
देयर वाज लिवींग
जोइंट फैमिली इन इंडिया
दैट इज कॉल्ड परिवार”

परिवार

परिवार को तोड़ने में अब तो
कानून ने भी बो दिए हैं बीज ।
जायज है लिवइन रिलेशनशिप
और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज ।
ना मुर्गी ना अंडा न
सास ससुर का फंडा ।
जब पति पत्नी ही नहीं
तो परिवार कहाँ से बसते ।
कॉन्ट्रैक्ट खत्म ,चल दिये
अपने अपने रस्ते ।
इस दौरान जो बच्चे हुए,
पलते हैं यतीमों की तरह ।
पीते हैं तिरस्कार का जहर ।