क्या दिल में मेरा खयाल फिर कभी नहीं आया

क्यू मुझसे मिलकर तुमने मुझे अपना बनाया
सीने से लगाकर मैंने तुम्हे दिल मे बसाया
अपनी दुनिया समझकर मैंने तुम्हारा साथ निभाया
क्या दिल में मेरा खयाल फिर कभी नही आया

क्यू तुम बदल गए आज तक समझ नही आया
सपनों को हकीकत बताकर क्यू मेरा दिल बहलाया
मेरी कशिश का तुमने इस तरह मजाक बनाया
क्या दिल में मेरा खयाल फिर कभी नहीं आया

क्यू प्यार की परिभाषा से मुझे वाकिफ कराया
तुझसे जुड़ी यादों को फिर मैंने अश्को मे बहाया
जब भूलना ही था तो मझे अपना क्यू बनाया
क्या दिल में मेरा खयाल फिर कभी नहीं आया

क्यू इस दिल में साथ रहने का सपना सजाया
मेरा बेहिसाब सा प्यार तुम्हे समझ नहीं आया
मुझसे बहुत दूर जाकर मुझे यू बेबस सा बनाया
क्या दिल में मेरा खयाल फिर कभी नहीं आया

Dil ki Khaani by Zulfi

سجا رہا ہوں میں اک بار پھر عزا خانے
سفر سے آئیں ہیں کچھ لوگ ہوکے بے گانے

بس ایک اجنبی سایہ ہمارا لگتا ہے
تمام لگتے ہیں ہم کو یہ چہرے پہنچانے

امیر شہر کی ظلمت نے رنگ دکھلایا
چھلک رہے ہیں یہاں صبر کے بھی پیمانے

خدا کرے وہ پلٹ آئے آج صحرا سے
کہ یاد کرتے ہیں اس کو مکاں کے ویرانے

ہوا کے دوش پہ خوشبو ہےکس کی بتلاؤ
چراغ ہوتے ہیں مدہوش کیوں خدا جانے

غموں سے چور بدن اپنا ہوگیا سارا
صدائیں دیتے ہیں مجھ کو نگر کے میخانے

ہماری زلف کی وحشت ہے آج تک زلفی
تلاش کرتے ہیں ہم کو ادب کے دیونے

ذوالفقار خان زلفی

क़ुबूल हैं

वो खिज़ा में झड़ते पत्ते
वो नदी का सूखा जाना

वो जन्नत तक जाते रश्ते
वो साखों का झुक जाना

सब हमे क़ुबूल हैं

वो इश्क़ के तामीर छत्ते
वो परिंदे का वापस आना

वो काँधे में यादों के बस्ते
वो मंज़िल का मुकर जाना

सब हमे क़ुबूल हैं

वो सुकून के साथी फ़रिश्ते
वो नींदों को ख़्वाब का फुसलाना

वो अंगारों से दहकते रिश्ते
वो आंसुओं से शोले बुझाना

सब हमे क़ुबूल हैं

Asvony_Singh