दुरियाँ..!

साथ भीगे बारिश में ये अब मुमकिन ही नही……!!
चलो भीगते है यादोऺ में, मैं कही…तुम कही…..!!

love

आज जरा सी क्या इच्छा जताई आपने हमसे दुबारा मिलने की।
ये कम्भख्त मेरी सांसे फिर जिंदगी जीने की जिद पे अड़ गईं।।

हम भी नही करते..!

मिला वो भी नही करते,
मिला हम भी नही करते.”

“दगा वो भी नही करते,
दगा हम भी नही करते.”

“उन्हे रुसवाई का दुख,
हमे तन्हाई का डर”

“गिला वो भी नही करते,
शिकवा हम भी नही करते.”

“किसी मोड़ पर मुलाकात हो जाती है अक्सर”
“रुका वो भी नही करते,
ठहरा हम भी नही करते.”

“जब भी देखते हैं उन्हे,
सोचते है कुछ कहें उनसे.”

“सुना वो भी नही करते,
कहा हम भी नही करते.”

“लेकिन ये भी सच है,
की मोहब्बत उन्हे भी हे हमसे”

“इकरार वो भी नही करते,
इज़हार हम भी नही करते.”

भूल जाता हूं मैं

तेरे बालों का तेरे माथे पे आना,
तेरी उंगलियों का उन्हें हल्के से सवारना,
…………………………………………….. भूल जाता हूं मैं ||

मुझे आवाज लगाना ,मुझे बुलाना ,
मेरे मुड़ने पर प्यारी सी मुस्कान देना,
……………………………………….. सब भूल जाता हूं मैं ||

बेइंतहा मोहब्बत है तुमसे ,यह बात तुम्हें बताना ,
अपनी परछाई से ज्यादा तुमपे भरोसा है ,यह तुम्हें बताना,
…………………………………….अक्सर भूल जाता हूं मैं ||

किसी और के जरिए मुझे हर बार जलाना ,
कभी कान में फुसफुसाना तो कभी जोर से चिल्लाना ,
…………………………………………सब भूल जाता हूं मैं ||

तुम्हारी वो white वाली T-shirt और वो pink वाली skirt,
वो scretch वाली jeans और वो blue वाली shirt तो याद है …..पर उस लहंगे में बाकमाल लगती हो ,
यह तुमसे मिलकर तुम्हें बताना,
……………………………………… हमेशा भूल जाता हूं मैं ||

वह bio के notes और वो history वाला page तो याद है मुझे ,
पर रात भर जग कर बनाई हुई तुम्हारी sketch,
……………………………………. दिखाना भूल जाता हूं मैं||

पुराने messages को टटोलने में ,
तुम्हारे आए messages को पढ़ना ,
तुमसे बातें करना तुम्हें reply करना ,
…………………………………कभी कभी भूल जाता हूं मैं ||

लेकिन,, लेकिन तुम्हारी एक call पर सुनी,
वो तुम्हारे सांसो की आवाज,
आज भी इन कानों में गूंजती है …तो ज्यादा तो कुछ नहीं,
…………………… पर कुछ समय सांस लेना भूल जाता हूं मैं ||

मां

गर्मी की आफताब में परछाई है वो,
जाड़े की ठंड में रज़ाई है वो ।
वो वर्षा है, शरद् है, वसंत की शीतलता है,
जाड़े में जलती मशाल की गरमाई है वो ।।

बेड़ियों में बंधे गुलामों की रिहाई है वो,
जलते ज़ख्मों की मरहम दवाई है वो ।
वो इश्क है, मोहब्बत है, खुदा की इनायत है,
बड़ी मुद्दत से मिली रहनुमाई है वो ।।

हर बच्चे की मनपसंद मिठाई है वो ,
हर अचार में मिलने वाली खटाई है वो ।
वो घी है, शक्कर है, दूध-सी सच्चाई है,
हर कृष्ण की मक्खन-मलाई है वो ।।

गीता में लिखी सच्चाई है वो,
कुरआन की पाक लिखाई है वो ।
वो दसम ग्रंथ है, बाइबिल है, पुरान-सी सच्ची किताब है,
मस्जिद में बैठे खुदा की खुदाई है वो ।।

मोतियों की चमक है वो,
कलियों की‌ दमक है वो ।
वो सागर है,किनारा है,हर डूबते का सहारा है,
रातरानी की मनोहर महक है वो ।।

हर गरीब की भूख है वो,
हर प्यासे के लिए कूप है वो ।
वह रोटी है,पानी है,चंद्रमा-सी शीतलता है,
मां दुर्गा,मां सरस्वती,मां देवी की रूप है वो ।।

हर चोट की आह है वो,
श्रावण-सी पावन माह है वो ।
वो आंसू है,दुख है,हर जीव की चाह है,
भूले-भटके राहगीर की राह है वो ।।

आज़ाद उड़ान भरने के लिए आसमां है वो,
हर किसी के दिल में बसने वाली जां है वो ।
वो जन्नत है, स्वर्ग है, मेरी पूरी दुनिया है,
मेरा जीवन, मेरा संसार……..मेरी मां है वो ।।

……..………………………अभिषेक मिश्रा

सेतु कविता

हे रे कोरोना कब जाओगे तुम कहो ना
जगत को सारा बंधक बनाके मुश्किल मे है डाला ……
जनम लिया है तूने वुहान शहर मे
वायरस रुप बनाया
पता न लगे के तेरा जनम हुआ है
चीन ने सबसे छिपाया
इसपेन इगलेड अमरीका मे
कितना कहर है ढाया…..
स्टे होम लाकडाउन सोसल डिस्टेन्स का
मंत्र बताया मोदी ने
घर से निकलो किसी से न मिलना
यंत्र बताया मोदी ने
सेनेटाइजर से हाथ है मलना
साबुन से हाथ धोना ……
लाश का अंबार लगता प्रतिदिन
मौत न रोके से रुके
बंद हुए कलकारखाना भी
अर्थव्यवस्था भी टूटे
सबके सहयोग से हारे कोरोना
साथी हाथ बढ़ाना ….
कोरोना कब जाओगे कहो ना