जिनके नाम की ही हम र…

जिनके नाम की ही हम रोज़ साँसें लेते हैं।
बिना बोले जिनको हम आँखों से पढ़ लेते हैं।।

जानते हुए भी जब वो अजनबी बन जाते हैं।
क़सम से ज़िंदा होकर भी हम मुर्दा बन जाते हैं।।

बातें सुनें बिना भी …

बातें सुनें बिना भी सिर हिलाते हैं लोग,
झूँठ में भी ‘हाँ में हाँ’ मिलाते रहते हैं लोग।

अपना काम बनाने में ही लगे रहते हैं लोग,
ना चाहकर भी जाने कैसे मुस्कुराते हैं लोग।

पहले अपना नफ़ा नुक़सान देखते हैं लोग,
बाद में दूसरे के बारे में कुछ सोचते हैं लोग।

सारे बुरे नहीं होते हैं बहुत अच्छे भी हैं लोग,
प्रभु के रचाये संसार में भाँति भाँति के लोग।

फूल सुंदर …

*??फूल??*
सुंदर रचना है प्रभु की सुंदर प्यारे फूल,
खिलखिलाते रहते हमेशा चाहे उड़े धूल।

शायद ज़िंदगी ने मुस्कुराना इनसे सीखा,
इनके बिना जीवन अधूरा और है फीका।

देखके इनको आँखों में चमक आती है,
प्यार आता इन पर नज़र ठहर जाती है।

झूम झूम के जैसे मानो गाना गा रहे हैं,
छोटे से जीवन का आनंद उठा रहे हैं।

यह प्यारे फूल सुख दुख के भी साथी हैं,
खिलते बुझते रहते हैं जैसे दीया-बाती हैं।

लाल पीले हरे गुलाबी बहुरंगो के राजा हैं,
कुदरत ने इनको सुंदर ख़ुशबू से नवाज़ा है।

देख के लगता इनको जैसे कुछ कह रहे हैं,
जीवन की धारा में मानो मस्ती में बह रहे हैं।

बेख़ौफ़ मौत से ये फ़िज़ा में इत्र घोलते हैं,
बाँट दो ख़ुशियाँ जीवन में मानो बोलते हैं।