हाय! कोरोना म…

? हाय! कोरोना?
मुझे डर नहीं खुद के मर जाने का,
पर अपनों को खोने से डरती हूँ।

अकेले ही न चले जायें हम यतीमों की तरहां
कोरोना के इस मचे क़हर से डरती हूँ।

उफ़ ये सेल्फ़ी…

?उफ़ ये सेल्फ़ी?

मैं अपने पति के साथ में घूमने जा रही थी।
वहाँ खडी़ युवती तरह तरह के मुँह बना रही थी।

मैं पति को बोली ये तुम्हें देखकर क्यों इतरा रही है,
कभी कानों तक मुस्कुराहट, कभी आँखें मटका रही है।
मेरे पति बोले, तू क्यों अपना दिमाग़ लगा रही है,
ध्यान से देखो, वो सेल्फ़ी के पोज़ बना रही है।

मेरी आँखें कोहतुहल से चौडी़ होती जा रही थी,
चारों तरफ़ सेल्फी लेने वालों की भीड़ नज़र आ रही थी ।
पति बोले तुम्हें इतनी हैरानी क्यों हो रही है
ये कोई आश्चर्य नहीं आम बात हो गई है।

इतने में चिल्लाने की आवाज़ आई,
मुझे कोई तो बचा लो भाई।
मैं बोली, ये कौन चिल्लाया,
पति बोले, लगता है सेल्फी का शोक उभर आया।

वहाँ जाके देखा तो, इक युवती गिरी पडी़ थी,
दर्द के मारे वो कहरा रही थी।
उसको उठाने के लिए, मैनें अपना हाथ बढ़ाया,
हाथों से उसने मुझे, इशारा दिखलाया।

बोली ,आंटी प्लीज़ , मेरी एक पिक लेना,
फिर अपने हाथों से, मुझको खींच लेना।
इक पल लगा, इसको पकड़ूँ या वहीं छोड़ दूँ,
फिर लगा क्यों इंसानियत से नाता तोड़ दूं।

मैं बोली. फिर क्यों ये, अपना टाइम वेस्ट कर रहें हैं,
कुछ को छोड़कर, बाक़ी अपने को ही छल रहे हैं।
पति बोले, नहीं पगली इस सेल्फी को फ़ेस बुक पर डालेंगे,
कितने लाइक आए हैं, देखने में पूरा दिन निकालेंगे ।

मैं बोली, पार्क में टहलने की सेल्फी मुझे तो अजीब लगती है,
देखो न घूमने आयी थी, पर यहाँ सबको देखने की लगती है।
पति बोले क्यों नहीं, कल से तुम भी नए मोड़ में आ जाना,
चेहरा लीप पोत के, मोबाईल हाथ में ले आना।

मैं जब तक तीन चार चक्कर, पार्क के लगाऊँगा ,
तब तक खींचो सेल्फी जबतक लौट तुम तक आऊँगा ।
मैं बोली, मुझे सेल्फी की नहीं , हैल्थ की पड़ी है,
पति बोले , हाँ तभी तो एक घंटे से वहीं खड़ी है।

घर आकर जैसे ही मैनें, अपना फ़ोन उठाया,
अचानक पति देव का ग़ुस्सा मुझ पर भर आया।
बोले, टहलने की आदत वर्षों से न सीख पायी हो,
सेल्फी़ की बीमारी, एक दिन में ही घर ले आई हो।

मैं बोली सच्च कहते हो, इस पर लाइक तो बनता है,
पर बिना प्रमाण की बात का, कुछ आधार न बनता है।
कल घर से निकलने से पहले, इक सेल्फी़ खिचवालेंगे,
अपने हैल्दी जीवन का, उसको एक प्रमाण बना लेंगे।