दोस्तों की महफ़िल …

दोस्तों की महफ़िल
सजे ज़माना हो गया।

लगता है खुल के जिए
जैसे ज़माना हो गया।

काश कहीं मिल जाए
वो काफिला दोस्तों का।

उनके बिना जिंदगी जिए
एक ज़माना हो गया।

चूम लिया करो …

“चूम लिया करो”
हर ग़म को यारों
मुकद्दर मान कर..!!

जिंदगी जैसी भी है
‌ आखिर है तो
अपनी ही यारो..!!

मदहोश रुख़…

*** मदहोश ***
रुख़्सते यार का मंज़र
भी क्या मंज़र था…..

मैंने ख़ुद को ख़ुद से
बिछुड़ते देखा…!!!