ये उम्र का तकाज़ा है…

ये उम्र का तकाज़ा है ग़ालिब,
यहाँ उम्र के हर पढ़ाव में
शौंक और पसंद बदल जाती है।

वो आवाज जो कल तक
कोयल सी मीठी लगती थी
आज फटा बाँस नज़र आती है।

दौर काग़ज़ी था! प…

*दौर काग़ज़ी था!*
*पर देर तक ख़तों में*
*ज़ज्बात महफ़ूज रहते*

*अब मशीनी दौर है!*
*उम्र भर की यादें*
*उॅंगली से डिलीट हो जाती हैं!*