बदलता जीवन

बचपन में प्यार से रहते हैं सभी,
बड़े होकर क्यों बदल जाते हैं सभी।
बचपन तो है प्यार का संसार,
बड़े होकर क्यों बना लेते हैं बेकार।
एक फुलवारी में बीता बचपन,
बड़े होकर हो गया सबका अपना उपवन।
छोटे छोटे चीजो में लड़कर,
बचपन बीता हँसकर।
बड़े में लड़े क्यों सभी कसकर,
न रहा कोई ना रहने दिया किसी को हँसकर।
झूठा प्यार और दिखावा रह गया बचकर,
रख दिया इस प्यार भरे संसार को नाशकर।
बचपन का दिन होता है अनमोल,
क्योंकि नहीं करता है कोई किसी चीज का मोल।
अच्छा होता हम ना होते कभी बड़े,
यह प्यार हमारे ना होते कभीे कड़े।
बचपन का दिन हो या हो जाए हम बड़े,
नहीं होने दे इस जीवन को जलधि के जल जैसे खरे।
इस जीवन को जिए हम मजे से,
नहीं होने दे लड़ाई किसी का किसी से।।
Composed by `AMRITA´

Bachppan

कागज की कश्ती थी, पानी का किनारा था ।
खेलनें की मस्ती थी, यह दिल आवारा था ।।
कहॉ आ गए इस समझदारी के दलदल में ।
वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था ।।

Ek bachpan ka zamana…

Ek bachpan ka zamana tha,
jisme khushiyon ka khazana tha;

chahat chand ko paane ki thi,
par dil titli ka deewana tha.

Khabar na thi kuch subah ki,
na shaam ka thikana tha;

thak haarke aana school se,
par khelne bhi jaana tha.

Maa ki kahani thi,
pariyon ka fasana tha;
barish mein kagaz ki naav thi,
har mausam suhana tha.

Har khel mein saathi the,
har rishta nibhana tha;
gum ki zuban na hoti thi,
na zakhmon ka paimana tha.

Rone ki wajah na thi,
na hansne ka bahana tha;
kyon ho gaye hum itne bade,
isse achha to woh bachpan ka zamana tha………