तुम ही

उफ्फ ,
बयां ना होने वाले किरदार बहुत है ,
सब दुआए एक तरफ ,
और मेरे जज़्बात एक तरफ है ,
क्या अंधेरों में रोशनी को जुगनू भी बहुत है ,
छुपे राज़ बहुत है ,
बयां करने वाले सख़्श कम हैं ,
की गीन गीन रातों में तारे गिनने के अंदाज़ बहुत हैं ,
मैं आधा हुआ ,
क्या इतने सारे जज़्बात बहुत हैं?
चादरे समेटी कई किनारों से ,
उनमें पलने वाले सपनों की बाते थोड़ा अलग हैं ,
तुम्हारा यू हर बात को गहराइयों से सोचना ,
मुझे ये अंदाज़ पसंद है ,
ना चाह कर भी तुमसे बात कर दिल को थाम लेना ही मेरे लिए बहुत है ,
तुम सावनो सी बारिश का अंदाज़ बनों ,
मै तुमको बसंत के फूल सा चमचमाता दिखूंगा,
क्या जुबां पे ताला लगाओगे ,
पास बैठ कुछ कहानियां सुनाओगे ?
या बस कुछ बाते बोल ,
चलो अलविदा लेते है केह के वापस छोड़ जाओगे ,
बयां ना हुआ किरदार तेरा ,
क्या मुस्कुरा के जाओगे या दिल लगा के जाओगे ❤️❤️❤️

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