मेरी विजय

झूठे कहीं के……….

मुझे तुम पर
पूरा भरोसा है कि
तुम मेरी बातों का
कभी बुरा नहीं मानोगी
मगर जब
तुम कहती हो
झूठे कहीं के
मैं समझता हूँ
तुम्हारा यह कहना भी
तुम्हारी सह्रदयता प्रकट करता है
भले ही तुम बुरा ना मानो
रूठने का हक तो तो
हमेशा रहेगा तुम्हारा
और सच कहूं तो मुझे भी
इस तरह से तुम्हारा रूठना
कभी खला नहीं
चाहे पलट गए
कैलेंडर के पन्ने
घूम गई घड़ी की सुइयां
और बदल गए
मौसम संग लोग भी
अच्छा लगता है कि
तुम कुछ भी नहीं बदली
चाहता हूँ
हम बदले भी नहीं
तुम मुझे झूठे कहती रहो
और
मैं रूठने मनाने के
इस खेल में हमेशा हारूँ
कमतर
तुम्हारी ऐसी मुस्कुराहट पर
मेरी विजय तो छुपी होगी ……………

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