मेरे तट आना

आना तुम मेरे घर
अधरों पर हास लिये
तन-मन की धरती पर
झर-झर-झर-झर-झरना
सांसों में प्रश्नों का आकुल आकाश लिये

तुमको पथ में कुछ मर्यादाएं रोकेंगी
जानी-अनजानी सौ बाधाएं रोकेंगी
लेकिन तुम चन्दन सी, सुरभित कस्तूरी सी
पावस की रिमझिम सी, मादक मजबूरी सी
सारी बाधाएं तज, बल खाती नदिया बन
मेरे तट आना
एक भीगा उल्लास लिये
आना तुम मेरे घर
अधरों पर हास लिये

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