मोह

मुग्ध हू
या
हू मोहित
मुग्धा बहुत सुंदर
है तुम्हारा चित्र
आसक्त आलिंगन
या
मधुर अधरों का
चुम्बन
नेह की ये भावना
या
संतप्त
ह्रदय कि
मधुर कामना
क्यु है
इतनी विचित्र
मेनका सी तुम
और मन विश्वामित्र
कितना सुंदर है प्रिया
तुम्हारा चित्र
मुग्ध हू
ओर हू
मोहित
क्या करू
सौंदर्य को
अगर
कामना छू जाए
इतनी प्यारी
हो तुम
क्यो न मोह मुझे
हो जाए………

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