इज़हारे मोहब्बत

प्रफुल्लित मन की
श्रृंखला के घुंघरू
अब बजने लगे हैं,
दिल में
मोहब्बत के तार
सरगम बनके
खनकने से लगे हैं।

लगता है कि
वो भी मेरी बेचनी को
समझने लगे
हैं,
शायद वो भी अब
मेरी तरह
गुमसुम से रहने
लगे हैं।

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