याद न कर

जानेवाले पर शोक़ नहीं
आनेवाले पर रोक नहीं
जो चला गया उसे जाने दो
आनेवाले को आने दो
अब चिंता और इकरार क्यों
जो अपना नहीं तकरार क्यों
मतलब के लोग मिलेंगे तुझे
अपनाकर खूब छलेंगे तुझे
अब भूल भी जा उसे याद न कर
अपनी हस्ती बर्बाद न कर
तेरा भी सवेरा आएगा
ढेरों खुशियां ले आएगा
कर खुदी को तू बुलंद इतना
ऊंचा हो कद अम्बर जितना
तुझे देख के फिर वह आएगा
अरदास तुझी से लगाएगा
तुम उसको अब कभी माफ न कर
जो चला गया उसे याद न कर
कवि:श्रवण चौधरी “राही”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *