आ बैठ ऐ जिंदगी सुख द…

आ बैठ ऐ जिंदगी सुख दुःख की बतलाते हैं
उलझनें जिवन की आ दोनों सुलझाते हैं!!

                          झूठ कहते हैं लोग कि   
                          तु सबको रूलाती है   
                          मुश्किलों के दरिया में हमको 
                           तैरना तु ही तो सिखाती है 

मुनासिब नहीं हमारा यूँ
एक दूजे से खफा हो जाना
आ थाम हाथ मेरा
फतेह नई ऊंचाइयों को करते हैं..!!

                       आ बैठ अ जिंदगी.... A. D✍

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