नफ़रत का बाज़ार न बन…

नफ़रत का बाज़ार न बन।
फूल खिला तलवार न बन,
रिश्ता रिश्ता लिख मंजिल।
रस्ता बन दिवार न बन,
कुछ लोगों से बेर भी ले।
दुनिया भरका यार न बन,
अपना दर ही दार लगे।
इतना दुनियादार न बन,
सब की अपनी साँसे है।
सब का दावेदार न बन,
कौन ख़रीदेगा तुझको।
उर्दू का अख़बार न बन,

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