पतवार छोड़ो…पाल खोल…

पतवार छोड़ो…पाल खोलो
हवाएं ले जायेजिधर..तुम हवाओं क़े सहारे
उस तरफ चल पड़ो….
अब ये मांझीका कौन अहसान उठाएं
अच्छा होगा लंगर भी तोड़ दो किश्ती भी”उस “पर छोड़दो
अब ये जिधऱ ले जाए तुमहे
अगर मझधार मे डुबो दे तो वही किनारा है क्योंकि
अब डूबना भी तुम्हारा उबरना है

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