पता ही नहीं चला ये …

पता ही नहीं चला ये
जिंदगी कब रुढ गयी,
पता ही नहीं चला, ये
सफर कहाँ तक आ गया,
पता ही नहीं चला बच्चपन
की वह बातें कंहा तक खो
गयी,
पता ही नहीं चला ये हंसी
जो चेहरे की नूर होती थी
वह एक नकाब बन गयी,
पता ही नहीं चला सपनों
की दुनियाँ से हम इस कपटी
दुनियाँ में खो गये..
कुछ पता ही नहीं चला
माशुम सी जिंदगी किस कोने
में सिमट गयी..

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