बहुत कुछ बाक़ी है …

बहुत कुछ बाक़ी है

अभी कहाँ आकर खड़ी हो गई तू मौत अभी सारे काम तो बाक़ी हैं
अभी अभी तो आँखों ने सपने संजोए हैं साकार करना अभी बाक़ी है।
अभी तो कच्चे घरों में बीत रही थी ज़िंदगी पक्के घर की उम्मीद अभी बाक़ी है,
अभी तक सोए हैं बस ज़मीन पर गद्दे पर सोने की तलब अभी बाक़ी है।
अभी तो पेट भरने की चिंता से बाहर नहीं निकले दुनियाँ देखना बाक़ी है,
ज़िंदगी की रंग बिरंगी गलियों की झलक इन आँखों से देखना बाक़ी है।
अभी तो ज़िम्मेदारी को पूरा करने की मन की जद्दोजहद भी बाक़ी है
ख़त्म हो गई उम्र की तय सीमा खुद को जानने की कोशिश अभी बाक़ी है।
और अंत में ऐ मौत कुछ का अहसान और कुछ के प्यार का क़र्ज़ चुकाना बाक़ी है।

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