प्रेम क़ुदरत की …

*प्रेम *

क़ुदरत की वादियों में टहलते हुए
हम उनसे प्रेम का मतलब पूछ बैठे,
उन्होंने कहा, इस कुदरत की
ख़ूबसूरत रचना को देखकर
तुम दिल में जो महसूस करते हो और
जो तुम्हें रूह तक छू जाए वो प्रेम है।
सनसनाती हवा,लहलहाते पत्ते,
खिलखिलाते फूल श्वेत बर्फ़ जो
तुम्हारे चेहरे की रौनक़ को बिना
श्रृंगार चार गुणा बढ़ा दे वो प्रेम है।

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