शेखर जीने की आरज़ू…

‘शेखर’ जीने की आरज़ू में
क्यूँ तिल तिल यूँ मर रहे हो
लम्हों में क़ैद ये ज़िंदगी
क्यूँ सदियों में जी रहे हो

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