इंसान बनना है दु…

इंसान बनना है

दुनियाँ की भीड़ में मुझे इंसान बनना है,
ना ग़रीब और न मुझे धनवान बनना है।

ये उम्र सिर्फ़ इन बातों में नहीं गवानी है
अमीर गरीब तो क़िस्मत की कहानी है।

कुछ नहीं पास तो चिंता की क्या बात है
सृष्टि में भरी पड़ी प्रभु की दी सोग़ात है।

पैसों की चिंता में नहीं मुझको जलना है
सुंदर प्रकृति का रंग इन आँखों में भरना है।

जैसी भी मिली ज़िंदगी शुक्र गुज़ार रहना है
ठहरा हुआ पानी नहीं बहता झरना बनना है।

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