गुनाह किस गुनाह …

*गुनाह *

किस गुनाह की बात करता है तू
दिल यहाँ गुनाह तो हर रोज़ होते हैं।

मुँह पर मुस्कुराते दिखते हैं जो
चेहरे वो पीठ पीछे कुछ और होते हैं।

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