ना रास्ता कहीं ठहरा,…

ना रास्ता कहीं ठहरा, ना मंजिलें ठहरी
ये उम्र उडती हुई गर्द में गुज़ार चले

हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले

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