लेशमात्र भी शक होता…

लेशमात्र भी
शक होता अगर
तुम्हारे विश्वास पर,
हम कदम नहीं बढ़ाते।

जो ज़ुबान के
पक्के नहीं होते
वहाँ हम दोस्ती
का हाथ नहीं बढ़ाते।

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