बोलिए सुरीली बोलियां…

बोलिए सुरीली बोलियां,
खट्टी मीठी आंखों की रसीली बोलियां।
रात में गोले चाॅंद की मिश्री,
दिन के गम नमकीन लगते हैं।
नमकीन आंखों की नशीली बोलियां,
गूंज रहे हैं डूबते साए।
शाम की खुशबु हाथ ना आए,
गूंजती आंखों की नशीली बोलियां।

गृह प्रवेश

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