बरसो मेघा️ बोली …

बरसो मेघा☁️

बोली में मिठास कानों में रस घोल रही थी
अंबुआ की डाली पे बैठी कोयल बोल रही थी

देख घनघोर घटा नभ में आनंदित हो रही थी
बरस जाओ अब तो मेघा मानो बोल रही थी।

तरूवर की पत्तियाँ भी इंतज़ार जोह रही थी
झूमती डालियाँ हवा से,मन को मोह रही थी।

ख़ुश थे ये बाग बगीचे मधुर तान को सुनकर
मुक्त कंठ से कोकिला मधुर रस घोल रही थी।

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