एक फ़र्ज़ निभाओ तो दूस…

एक फ़र्ज़ निभाओ तो दूसरा छूट जाता है!
एक को खुश करो तो दूसरा रुठ जाता है!

ज़िन्दगी अपनी मर्ज़ी से तो कभी नहीं चलती ,
बस अपनों के लिए फ़र्ज़ निभाते हुए ही गुज़र जाती है !!

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