पाने की चाहत ✍?

माना अपने प्यार को पाने की
चाह तो सब मैं होती है पर
पुरा हर कोई नहीं कर पाते हैं,
क्योंकि हर कोई माता के जैसा नहीं है,
क्योंकि इनकी चाहत तो ईश्वर को पाने की थी,
माना तपस्या तो इन्की थी, पर चाहत तो शिव जी को?
भी होगी॥
ईश्वर को पाना है तो ईश्वर के जैसा बनना
पड़ता है? , जिंदगी में कभी कभी अपने प्यार को
पाने के लिए खुद को भी खोना परता हैं॥ ?‍♀️?

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