गुरु

गुरु है , जग में सबसे महान ,
ब्रह्मा , विष्णु से ऊंचा है उनका स्थान ।।
प्राण है तुम्हारे आदर्श और शिष्टाचार ,
करते अपने शिष्यों को अंधकार से उद्धार ।।
कृपा बरसाओं निरंतर निर्झरिणी की तरह ,
हर शिष्यों को महकाओ ज्ञान से फूलों की तरह ।।
पाऐं सदा की हम शिष्य जनम ,
दूर करो हमारे जीवन के अंधकार और तम ,
हे गुरु,’ज्ञान दाता तुम्हें नमन ,
अपने स्पर्श से बनाओं हमें अनमोल रतन ।।

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