सफर ये दोस्ती का

जब मिले थे हम,न जान न पहचान
धीरे-धीरे हुई फिर, दोस्ती की शुरुआत
फिर ऐसे मिले हम,जैसे बचपन के दोस्त
दोस्ती का सिलसिला, तो अभी शुरु ही
हुआ था कि, आ गये हम ऐसे मोड़ पर
जहां बाते तो होगी, पर वो यारों की महफ़िल न होगी
आज चलना है या नही
ऐसी आवाज सुनाई नही देगी
ऐसी आवाज सुनाई नही देगी

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