कितना मुश्किल है:- …

कितना मुश्किल है:-

कितना मुश्किल है,
किसी के ज़ज़्बातों को समझना

बयां कर न सके जो हाल अपना
कितना मुश्किल है,
उस शख्स को परखना

अरमानों के महल जो ढह गये हैं
कितना मुश्किल है
उनका फिर से संवरना

देखे ख्वाब़ जो नींद मे कभी
कितना मुश्किल है
उनका अंजाम पर पहुंचना

छोड़ दिये दूर तक जो साथ चलकर
कितना मुश्किल है
वापस तन्हां लौटना

तोड़ दिया हो दिल बेरुखी से कोई
कितना मुश्किल है
टूटकर फिर मुस्कुराना

बेखुदी में लड़खड़ाये जो कदम
कितना मुश्किल है
फिर से संभलना

तेज झोंके हवाओं के उड़ा ले जाये
कितना मुश्किल है
बादलों का बरसना

दिल से चाहें हैं जिन्हें बेशुमार
कितना मुश्किल है
“गागर” उन्हें बिसरना

उमाशंकर अग्रहरि “गागर” वाराणसी।
दिनांक 4.7.2020।

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