❤️ साथी संगिनी …

❤️ साथी संगिनी ?
इस तरह तुम हमसे नज़रें न मिलाया करो,
मंद मंद मुस्कुरा कर ज़ुल्म न ढाया करो।

क्यों तुम्हें ख़ुदा ने इतना प्यारा बनाया है,
मासूम सा ये दिल तुम्हारे ऊपर आया है।

देखा जबसे तुमको और कोई न भाया है,
मेरी इन आँखों में बस तू ही समाया है।

तुम्हें तो अंदाज़ा ना होगा मेरी चाहत का
मेरे दिल में बसे हो तुम उसकी राहत का।

तुम से मेरा रिश्ता है आत्मा और रूह का,
बयाँ करना मुश्किल है उस जुस्तजू का।

मैं तुम्हारी संगिनी तुम साथी हो मेरे पिया,
उम्र का हर पल तेरी ज़िंदगी बनके जिया।

‘जीत’ की हर जीत में तुम शामिल हो जान,
मैं तुम्हारी और तुम मेरे चेहरे की हो मुस्कान।

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