जीने के लिए कोई आसरा…

जीने के लिए कोई आसरा ढूंड रहे थे,
कलम उठाई तो रास्ता मिला जीने का।

मैं गांव में न जाने कब से बरबाद कर रहा था पानी,
मैं पानी पानी हो गया जब मुझे खरीदना पड़ा पानी पीने का।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *