सच्चाई स्वयं की

मेरी सच्चाई से है बाकिफ ज़माना ।
गिरेबान में झाँकने की जरूरत मुझे नही।
और हिसाब बेहिसाब होगा जरूर गुनाहों का।
पर दिल किसी का दुखाना ,मेरे बस की बात नही।????writen by Gagan prashant dubey

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