ज़िंदगी मुस्कुराकर …

ज़िंदगी मुस्कुराकर जिओ?
निकले थे ख़ुशियाँ को ढूँढने,
सन्नाटा छा गया,
जो भी मिला रास्ते में,
अपना दुख सुना गया।

आँखों में आँसू थे उनके,
होंठ थरथरा रहे थे,
अंदर की पीड़ा को,
जैसे छिपा रहे थे।

किसी को पैसे किसी को रिश्ते,
नश्तर चुभा रहे थे,
सब अपने हालातों से,
परेशान नज़र आ रहे थे।

ये दुनिया है दोस्तों,
ख़ुशी से ग़म ज़्यादा हैं,
फिर भी मुस्कुरायेंगे,
मेरा आज ये वादा है।

जब अपना दुख दिखे
तो दूसरे का भी देख लेना,
सबको इस तरह देखके,
राह जीने की चल देना।

ख़ुशियाँ मिलें न मिले,
मुस्कुराना पड़ता है,
गिर भी जाये तूफ़ान में
खुद को उठाना पड़ता है।

जीत कहे यह जीवन
एक बार ही मिलता है,
जो मुस्कुराता है दुखों में,
जीतकर ही निकलता है।

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