कभी तो लौट के आओगे न…

कभी तो लौट के आओगे न तुम ,
मेरे नाम से मुस्कुराओगे न तुम ,
खोलेंगे दिल के किताबों के पन्ने ,
तबतक गुज़ारे कैसे ये लम्हे
लिखे गीतों में तुमको ,
या नींदो से माँगे तुम्हारे ही सपने ,
सपनों में तो प्यार बरसाओगी न तुम ,
कभी तो लौट के आओगे न तुम ………

यादों को जब शामों में घोलता हू ,
तुम्हारी डीपी को ज़ूम में खोलता हूँ ,
आँखें तुम्हारी बहुत बोलती है ,
राज़ दिल के सभी खोलती है ,
मेरे आंसुओ को तुम्हारे आंसुओ से तोलती है ,
मन्न ज़ोर ज़ोर से लेती है सिसकियाँ ,
सिसकियों को चुप्प काराओगे न तुम ,
कभी तो लौट के आओगे न तुम ……….

खो के तुमको , खुदको पहचाना है मैंने ,
इश्क़ है तुमसे कितना जाना है मैंने ,
बस तुम्हारा ही रहूँगा ये थाना है मैंने ,
दुनिया को खोकर भी तुमको ही पाना है मैंने ,
क्या फिर से मुझको अपना बनाओगी तुम ,
कभी तो लौट के आओगे न तुम …..

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