प्रभु की अद्भुत रचन…

प्रभु की अद्भुत रचना

कितनी रंग बिरंगी है दुनिया,
भिन्न भिन्न है लोग।
प्रभु की बनाई रचना में सबका
भिन्न भिन्न है योग।

कोई है उदास तो कोई ख़ुश,
खुशहाल रहता है।
कोई करता शिकायत प्रभु से,
कोई नसीब कहता है।

कोई बहुत वाचाल कोई बिल्कुल,
चुपचाप रहते हैं।
कोई बता देते हैं दर्द पर कोई,
सिले उनको रहते हैं।

कोई पुण्यात्मा और कोई बड़े,
पापी और उद्दंड हैं ।
कोई पाते प्रताप और कईयों को,
मिलते दंड हैं।

कोई उदारवादी समरस सरल,
विचारों वाले हैं।
कोई उग्र विचारों को लिए धर्म की,
डोर सँभाले हैं।

कोई निर्मल ह्रदय सबकी ख़ुशी की,
दुआ करते हैं।
कोई न जाने किस मिट्टी के घड़े हैं,
कभी नहीं पिघलते हैं।

जीत कहे समझ पाना मुश्किल है,
प्रभु की ये माया।
जाने क्या सोच के कर्ता ने विविध,
रंगों का संसार बनाया।

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