यादों के ज़ाम:- खुशि…

यादों के ज़ाम:-

खुशियां जो मिली तो हड़बड़ा के पी गये
ग़म आया जिंदगी में तो घबड़ा के पी गये

छूट चुकी थी लत पीने की न जाने कब से
देखा शराब था तन्हा तरस खा के पी गये

छलकती थी रोज मगर कम नहीं होती थी
आंखों की उस मय को कई बार पी गये

चर्चायें हुयीं सरेआम हंगामा बरप गया
क्या ज़ुर्म कर दिया जो थोड़ी सी पी गये

झपकने लगीं थीं आंखें नींद आने लगी थी
बंद होता मयखाना इसके पहले ही पी गये

बारिश की बूंदों से मौसम जो हुआ सुहाना
बरसे सावन झूम के इस वज़ह से पी गये

तन्हा नहीं पीता हूं सब पी रहे इस जहां में
कुछ गमों को तो कुछ इन्सां के खूं पी गये

शराब पीते हैं सोचकर कि गम पी रहे हैं
मगर”गागर”किसीके यादों के ज़ाम पी गये

उमाशंकर अग्रहरि “गागर” वाराणसी।
दिनांक 6.7.2020।

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