मां

गर्मी की आफताब में परछाई है वो,
जाड़े की ठंड में रज़ाई है वो ।
वो वर्षा है, शरद् है, वसंत की शीतलता है,
जाड़े में जलती मशाल की गरमाई है वो ।।

बेड़ियों में बंधे गुलामों की रिहाई है वो,
जलते ज़ख्मों की मरहम दवाई है वो ।
वो इश्क है, मोहब्बत है, खुदा की इनायत है,
बड़ी मुद्दत से मिली रहनुमाई है वो ।।

हर बच्चे की मनपसंद मिठाई है वो ,
हर अचार में मिलने वाली खटाई है वो ।
वो घी है, शक्कर है, दूध-सी सच्चाई है,
हर कृष्ण की मक्खन-मलाई है वो ।।

गीता में लिखी सच्चाई है वो,
कुरआन की पाक लिखाई है वो ।
वो दसम ग्रंथ है, बाइबिल है, पुरान-सी सच्ची किताब है,
मस्जिद में बैठे खुदा की खुदाई है वो ।।

मोतियों की चमक है वो,
कलियों की‌ दमक है वो ।
वो सागर है,किनारा है,हर डूबते का सहारा है,
रातरानी की मनोहर महक है वो ।।

हर गरीब की भूख है वो,
हर प्यासे के लिए कूप है वो ।
वह रोटी है,पानी है,चंद्रमा-सी शीतलता है,
मां दुर्गा,मां सरस्वती,मां देवी की रूप है वो ।।

हर चोट की आह है वो,
श्रावण-सी पावन माह है वो ।
वो आंसू है,दुख है,हर जीव की चाह है,
भूले-भटके राहगीर की राह है वो ।।

आज़ाद उड़ान भरने के लिए आसमां है वो,
हर किसी के दिल में बसने वाली जां है वो ।
वो जन्नत है, स्वर्ग है, मेरी पूरी दुनिया है,
मेरा जीवन, मेरा संसार……..मेरी मां है वो ।।

……..………………………अभिषेक मिश्रा

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