कुर्बानी का वक्त

नेता बनने की कुछ की ख्वाहिशें
जो बड़ी भीड़ के आगे चिल्ला रहे हैं
‘घरों से निकलो कि ये कुर्बानी का वक्त है’
और वो जो डिब्बों में भरा पेट्रोल दे गये हैं
इनका सियासी सांठ-गांठ अगर आप समझ लो;
अगर आप समझ लो कि ये जहरीली जुबान वाले
हाथों में माइक लिए जो हैं ‘सांपों के औलादे’ हैं
और वो जो मसीहे बन बैठे हैं धर्म की कुर्सियों पर
पानी नहीं, बेगुनाहों के खून पी पी कर जी रहे हैं
तो पाओगे,
ये जो देश जल रहा है
बेवजह जल रहा है|

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