जहां सजदा हो बुजुर्ग…

जहां सजदा हो बुजुर्गों का,
वहां की तहजीब अच्छी है।

जहां लांघे न कोई मर्यादा,
उस घर की दहलीज़ अच्छी है।।

घर बैठे ही पूरी हो जायेगी,
तुम्हारी यात्रा चार धामों की।

परिक्रमा मात-पिता की करलो,
गजानन की तरकीब अच्छी है।।

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