क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ में
क्यों मुझको तू छोड़ गयी
किस गलती के लिए तू मुझसे
सारे रिश्ते तोड़ गयी
माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ में
क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

मैं तब थी इक छोटी बच्ची
था दुनिया का होश नही
फिर उस नन्हीं सी उस कच्ची उम्र में
माँ क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

क्या तेरी ममता थी झूठी
या मेरे आँशुओ का था मोल नही
क्यों नन्ही सी छोटी उम्र में
माँ मुझको तू छोड़ गई।

वात्सल्य की तेरी अब चादर छुटी
मैं बनी इक अनाथ नई
माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ में
क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

वो तरी हाथों की थपथप
भी मुझसे अनजान हुई
सुन लोरी सोने की आदत
भी मुझसे मुँह मोर गई
माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ में
क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

जब रातों को डरकर माँ
मैं नींद से एकदम जाग गयी
सोचा लिपट कर तुझसे मैं
भूल जाऊं डर है कही
पर मैंने जब आँखे खोली
तू मेरे थी पास नहीं
माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ में
क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

अब चेहरे की हँसी शायद
माँ तेरी वजह से रुठ गई
माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ में
क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

रात आयी और सुबह गयी
और भिनि बरसात हुई
चारों दिशाओं में दूर दूर तक
खुशियों की बरसात हुई
पर मेरे कानों में माँ
बस यही आवाज हुई
माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ में
क्यों मुझको तू छोड़ गयी।

नीरज की कलम से……….

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