अक्स

मुझे अपने अक्स में उतारने की कोशिश ना करो
मुझे मुझसा ही रहने दो
मत सिखाओ जिन्दगी के मायने हर दफा
मेरी कहानी है, मेरे हिसाब से कहने दो

कुछ सालों में ही वो कितना बदल गया
एक मुझे छोड़ बाकी सब के अक्स में ढल गया
नदी की तरह बदल रही हुँ अपनी डगर
मुझे अब मेरे हिसाब से बहने दो
मेरी कहानी है, मेरे हिसाब से कहने दो

ए दिवार, तुम जरा यहाँ का हाल मां को बताना
घर का पता बदला है, मेरा अब भी वो है आशियाना
एहतराम ना मेरा और ना मेरे अज़ीज़ का यहाँ
जो मुनासिब नहीं कहीं नख़्ल को संभालना
उसे अपनी मिट्टी में ही रहने दो
मेरी कहानी है, मेरे हिसाब से कहने दो

जो अपनी आँखों से मेरी तहजीब तौले है
वही हर हर्फ औरों के सामने मिश्रीयो मे घोले है
मत करो मुझसे हर बार झुकने की उम्मीद
खंडहर में जो कल बदले ,इस आशियां को आज ही ढहने दो
मेरी कहानी है, मेरे हिसाब से कहने दो

सरगोशीयो से भरें ये दरों दिवार
बस इक आइना ही करवाता है मेरा खुद से खुद का दिदार
सोचती हूँ जल्द निकल पाऊं इस भंवर से
यूँ न हो सब्र पे मेरे हँसके बोले जफ़ा उनकी
जब तक सहती है इसे सहने दो
मेरी कहानी है, मेरे हिसाब से कहने दो

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