केवल कर्म ही अपना …

“केवल कर्म ही अपना है”

सीता के रखवाले राम थे,
जब हरण हुआ तब कोई नहीं।

द्रोपदी के पांच पाण्डव थे,
जब चीरहरण हुआ तब कोई नहीं।

दशरथ के चार दुलारे थे,
जब प्राण तजे तब कोई नहीं।

रावण भी शक्तिशाली थे,
जब लंका जली तब कोई नहीं।

अभिमन्यु राजदुलारे थे,
चक्रव्यूह में फंसे तब कोई नहीं।

सच यही है दुनियां वालों,
इस संसार में अपना कोई नहीं।

जो लेख लिखे कर्मों ने,
उस लेख के आगे कोई भी नहीं।

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